National Women Day 2025: आज भारत में बड़ी धूम-धाम से राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। हर साल 13 फरवरी के दिन राष्ट्रीय महिला दिवस को आयोजित किया जाता है। हालांकि इस दिन को लेकर कई लोगों में भ्रम रहता है कि महिला दिवस तो 8 मार्च को सेलिब्रेट किया जाता है। फिर 13 फरवरी को क्या खास होता है। लेकिन बता दें, 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

जबकि भारत में 13 फरवरी के दिन राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस खास दिन का देश की प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी सरोजनी नायडू से गहरा नाता जुड़ा है। इस दिन भारत की कोकिला और देश की पहली राज्यपाल सरोजनी नायडा की जन्मदिवस होता है। इसलिए हर साल राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में सरोजिनी नायडू के योगदानों को याद किया जाता है।

आज जब हम सरोजिनी नायडू को सम्मानित करते हैं, हम भारत में महिलाओं की प्रगति का भी जश्न मनाते हैं और लिंग समानता और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से प्रकट करते हैं। ऐसे में हम विशेष उपलक्ष्य पर आपको राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व और इतिहास के बारें में विस्तार से बता रहे हैं। आइए जानें...  

राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास
13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में जन्मी सरोजिनी नायडू को उनके माता-पिता से गहरा प्रभाव मिला। उनके पिता, अघोरेनाथ चट्टोपाध्याय, एक वैज्ञानिक थे। वहीं, उनकी माता जी वरदा सुंदरी देवी, एक कवयित्री थीं।

छोटी उम्र से ही साहित्य से प्रभावित, सरोजिनी नायडू ने कविता लिखने का शौक विकसित किया और अपनी काव्य रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हो गईं। जिसके लिए उन्हें 'भारत की नाइटिंगेल' का उपनाम मिला। उनकी कविताओं ने भारत की समृद्ध धरोहर, देश के प्रति प्रेम और इसके लोगों के संघर्षों को खूबसूरती से चित्रित किया।

कवि होने के अलावा, नायडू एक शक्तिशाली राजनैतिक नेता भी थीं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़कर ब्रिटिश शासन के खिलाफ मोर्चा खोला और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया।

कई बार गिरफ्तार होने के बावजूद, वे अपने उद्देश्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और भारत की स्वतंत्रता के लिए अपनी भाषण कला और नेतृत्व का उपयोग किया।

राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व
राष्ट्रीय महिला दिवस न केवल सरोजिनी नायडू की योगदानों को मनाता है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के महत्व को भी उजागर करता है। यह शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समान अवसरों की आवश्यकता की याद दिलाता है। भारत की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में बाधाओं को पार करके उत्कृष्टता प्राप्त कर रही हैं, जो यह साबित करती हैं कि प्रतिभा और मेहनत लिंगभेद से कहीं अधिक मजबूत होती हैं।

आज जब हम सरोजिनी नायडू को सम्मानित करते हैं, हम भारत में महिलाओं की प्रगति का भी जश्न मनाते हैं और लिंग समानता और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से प्रकट करते हैं।