रायपुर। एक अप्रैल से छत्तीसगढ़ में नई आबकारी नीति लागू हो गई है। इस बार सबसे खास बात यह रही कि, छत्तीसगढ़ का आबकारी विभाग और आबकारी सचिव बड़ी कंपनियों के दाम बढ़ाने की जिद आगे झुकी नहीं। जिसके चलते यह हुआ कि, कई बड़ी कंपनियों के अनेक ब्रांड्स प्रदेश में बिक्री के लिए रजिस्टर्ड नहीं हुई। लेकिन अब आबकारी विभाग की सख्ती के आगे उन कंपनियों ने भी घुटने टेक दिए हैं। लेकिन ऐसी सभी कंपनियां तीन महीने बाद अपने ब्रांड्स प्रदेश में बिक्री के लिए रजिस्टर करा पाएंगी।
उल्लेखनीय है कि, प्रदेश के सीमाई जिलों में बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से तस्करी कर लाई गई शराब की कई बड़ी खेपें पुलिस और आबकारी विभाग ने पिछले कुछ महीनों में जब्त की है। इनमें से ज्यादातर मिलावटी और हानिकारक पाई गई हैं। अब ऐसी तस्करी को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने टैक्स में कटौती की है, ताकि कीमतें कम रखी जा सकें और दूसरे राज्यों से तस्करी करने वालों को लाभ ना हो।
यहां देखें लिस्ट- शराब की इन ब्रांड्स को नहीं मिली है मंजूरी
जिन्होंने मानी शर्तें, उन्हीं कंपनियों के ब्रांड्स हुए रजिस्टर
वहीं आबकारी विभाग ने केवल उन्हीं कंपनियों के ब्रांड्स को प्रदेश में बिक्री के लिए रजिस्टर्ड किया है, जिन्होंने इस सत्र में कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। वहीं जो कंपनियां अपने ब्रांड्स की कीमतें बढ़ाने पर अड़ी रहीं, उनके आगे आबकारी विभाग नहीं झुका और अपनी शर्तों पर अड़ा रहा। इनमें कई लोकप्रिय ब्रांड्स भी शामिल हैं।
आबकारी विभाग के सख्त रवैये के आगे झुकी कंपनियां
आबकारी विभाग की सख्ती का असर यह हुआ कि, जो कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर अड़ी हुई थीं वे भी अब पिछली दरों पर प्रदेश में अपने ब्रांड्स बेचने की गुजारिश विभाग से करने लगी हैं। लेकिन ऐसी कंपनियों के ब्रांड्स फिलहाल तीन महीने तक को छत्तीसगढ़ में नहीं बिक पाएंगी। लेकिन अगली तिमाही वे कंनियां छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में अपने ब्रांड्स को रजिसटर कर पाएंगी, क्योंकि आबकारी विभाग हर तिमाही में कंपनियों के ब्रांड्स को रिन्यू करती है। इसका मतलब यह हुआ कि, दाम ना बढ़ाने की शर्त मान जाने वाली कंपनियों के ब्रांड्स भी छत्तीसगढ़ की शराब दुकानों में जुलाई से उपलब्ध हो सकेंगी।