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Paddy purchase fraud: अमरपाटन के आनंदगढ़ निवासी दादू जगदीश सिंह रीवा महाराज मार्तंड सिंह के भाई और गुलाब सिंह के बेटे थे। 2000 में उनका निधन हो गया, लेकिन प्रशासन ने जिंदा दिखाकर धान पंजीयन करा दिया।

Paddy purchase fraud: मध्य प्रदेश के मैहर जिले में फर्जीवाड़े का अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां 24 साल पहले स्वर्ग सिधार चुके रीवा राज घराने के पूर्व सदस्य दादू जगदीश सिंह जू देव के नाम पर धान खरीदी कर ली गई। एसडीएम ने फर्जीवाड़े की जांच कराने की बात कही है, लेकिन मामले से हर कोई हैरान है। 

अमरपाटन के आनंदगढ़ निवासी दादू जगदीश प्रसाद सिंह जू देव रीवा महाराज मार्तंड सिंह के भाई थे। उनका निधन 2000 में हो गया था। प्रशासन ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया है, लेकिन विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने चंद फायदे के लिए दस्तावेजों में उन्हें दोबारा जिंदा कर दिया। 

रामप्रकाश कोल ने कराया सिकमी पंजीयन 
दादू जगदीश प्रसाद सिंह जू देव के नाम धान बिक्री के दस्तावेज सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में बना हुआ है। उनका निधन 2000 में हो गया था। मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है, लेकिन अधिकारी-कर्मचारियों ने चंद फायदे के लिए दस्तावेजों में उन्हें दोबारा जिंदा कर दिया। आनंदगढ़ के रामप्रकाश कोल ने सिकमी पंजीयन कराया है।  

कौन थे दादू जगदीश सिंह? 
दादू जगदीश सिंह रीवा रियासत के महाराज गुलाब सिंह के बेटे थे। 1924 में उनका जन्म इलाहाबाद (अब प्रयागराज ) में हुआ था। उनका पालन पोषण रीवा किले में हुआ। महाराज गुलाब सिंह ने आनंदगढ़ की जागीर दादू जगदीश सिंह के नमा लिख दी थी। पंजीयन में उनकी इन्हीं भूमियों  को शामिल किया गया है। फर्जीवाड़े में धोबहट समिति प्रबंधक और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। 

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सन 2000 में हो चुकी है मृत्यु
इतिहासकार सीताशरण गुप्ता ने बताया, दादू जगदीश सिंह के पुत्र नहीं थे। इसलिए आनंदगढ़ जागीर की देख-रेख उनके दामाद और बेटी करती हैं। क्षेत्र के कुछ किसान ठेके पर खेत लेकर फसलों का उत्पादन करते हैं। आनंदगढ़ स्थित उनकी गढ़ी में दादू जगदीश की प्रतिमा स्थित है। इसमें उनका निधन वर्ष 2000 में लिखा है।  

अफसरों की मिलीभगत का खेल
दादू जगदीश की जमीनों पर खेती करने वाले रावेंद्र पांडेय ने अफसरों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। बताया कि मैं भी पंजीयन कराने के लिए गया था, लेकिन सह खाते जमीनें बताकर पंजीयन से इनकार कर दिया गया था। बाद में पता चला कि उसी जमीन का फर्जी पंजीयन कर दिया गया है। 

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कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
मैहर कलेक्टर रानी बाटड ने फर्जीवाड़े की जांच के निर्देश दिए हैं। कहा, मामला संज्ञान में आते ही अमरपाटन एसडीएम से बात की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। 

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