Tis Hazari Court: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सात साल पुराने तेजाब हमला मामले में ऐतिहासिक फैसला लिया है। कोर्ट ने 2017 में एक व्यक्ति और उसकी दो नाबालिग बेटियों पर तेजाब फेंकने के मामले में सजा का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी को 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश अदिति गर्ग ने लिया फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदिति गर्ग ने तेजाब हमले के मामले में फैसला लिया। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि सजा निर्धारित करते समय अपराध और सजा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुकदमे में भले ही देरी हो लेकिन समाज की रुचि और न्याय की भावना के मद्देनजर दोषियों के लिए नरमी नहीं बरती जा सकती। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि इस तरह के अपराध की गंभीरता को समझते हुए दोषियों को कड़ी सजा होनी चाहिए, ताकि ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
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युवक और उसकी नाबालिग बेटियों पर किया था हमला
बता दें कि पिछले साल नवंबर में 28 वर्षीय राघव मुखिया को तेजाब हमले का दोषी ठहराया गया था। सात साल पहले उसने 13 और 8 साल की दो मासूम और उनके पिता पर तेजाब से हमला किया था। अदालत ने मुआवजा देने का निर्णय लेते हुए कहा कि तेजाब हमले से पूरा परिवार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। पीड़ित युवक लंबे समय तक बिस्तर पर रहा और उसकी सेहत बिगड़ती गई। बाद में हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। दोनों बच्चियों के भविष्य पर असर पड़ा और वे मानसिक रूप से भी प्रभावित हुईं और करियर को आगे नहीं बढ़ा पाईं।
जीवन को संवारने का मौका
कोर्ट ने परिवार को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्णय लेते हुए कहा 'इस घटना के बाद परिवार को शारीरिक परेशानियों के साथ ही आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी। ऐसे अपराधों में पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। हम उनकी तकलीफ कम नहीं कर सकते लेकिन जीवन को फिर से संवारने का मौका जरूर दे सकते हैं।
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