हरियाणा सरकार के नए कानून का विरोध : झज्जर की छोटूराम धर्मशाला में व्यापारी वर्ग ने बैठक की। व्यापारियों ने कहा कि मार्च 2025 में बीज एवं कीटनाशक अधिनियम में किए गए संशोधन सही नहीं हैं। विक्रेताओं पर सख्ती बरतना भी ठीक नहीं है। विक्रेता तो लाइसेंस लेकर ही सरकार द्वारा तय कंपनियों का माल बेचते हैं। वहीं, उन्होंने नॉन बेलेबल वारंट का भी विरोध किया।
नए बीज अधिनियम कानून में यह हुए हैं बदलाव
नए बीज अधिनियम के अनुसार अगर कोई बीज और कीटनाशक निर्माता कंपनी पहली बार दोषी पाई गई तो दो साल तक कैद और तीन लाख तक जुर्माना होगा। यदि कंपनी दोबारा दोषी मिली तो यह तीन साल तक सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना होगा। वहीं, डीलर को एक साल तक सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोबारा पकड़े जाने पर दो साल तक कैद और दो लाख रुपये तक जुर्माना होगा। पहले यह जुर्माना मात्र 500 रुपये था और दोबारा पकड़े जाने पर छह महीने की जेल या एक हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। इस वजह से दोषी इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते थे।
सैंपल सब डिवीजन होने पर नॉन बेलेबल वारंट गलत
व्यापारियों ने बैठक में कहा कि सरकार की ओर से जो बीज अधिनियम बनाए गए हैं उनमें खामियां हैं। उन्होंने बताया कि खाद, बीज एवं कीटनाशक सैंपल सब डिवीजन पाए जाने से नकली साबित नहीं होते। लेकिन अधिनियम में यह नियम है कि सैंपल सब डिवीजन जाना नॉन बेलेबल वारंट होगा। व्यापारियों ने इसे बदलने की गुहार लगाई और प्रशासन को सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
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