National Inventor Day: आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। कुछ ऐसा की कर दिखाया है भोपाल के इन इन्वेंटर्स ने। समाज में पॉजिटिव बदलाव लाने किसी ने रोबोट बना दिया तो किसी ने कैंसर रोधी फार्मूला। कोई अपने नवाचार के दम पर बिजली बचा रहा है तो कोई प्रकृति संरक्षण में सहभागिता निभा रहा है। आज नेशनल इन्वेंटर-डे हरिभूमि पढ़ें अविष्कारकों की सक्सेस स्टोरी...।
मैनिट की प्रोफेसर डॉ. सविता दीक्षित ने नीम, आंवला, एलोवेरा, श्यामा तुलसी और सेब से कैंसर रोधी हर्बल फॉमूर्ला तैयार किया है। उन्होंने चूहे पर इसका एक्सपेरिमेंट भी किया है। चूहे के ट्यूमर में रिडक्शन हुआ। प्रो सविता दीक्षित अब तक 4 पब्लिश पेटेंट रजिस्टर करा चुकी हैं। इन नवाचारों के लिए उन्हें नौ अवार्ड भी मिल चुके हैं। इन्होंने वेस्ट मटेरियल से पॉलीमर कम्पोजिट भी बनाया, जो प्लाइवुड का बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे प्लाईवुड के लिए हरे पेड़ नहीं काटने पड़ेंगे। इसके अलावा पल्स्टिक के टुकड़ों में कटेलिसिस मिलाकर फ्यूल और थर्माकोल से फेविकोल जैसा गोंद बनाया है। इससे प्रकृति और वातावरण को काफी फायदा होगा।

चिपक सकता है फर्नीचर
डॉ. सविता दीक्षित ने कहा कि गोंद एक्स्टेंडेट पॉलीएस्टरीन है, यानी इसका हर एक छोटा सा टुकड़ा भी मिट्टी में जाता है तो इसे डिकंपोज होने में हजारों साल लगेंगे। क्योंकि थर्माकोल पेट्रोल में घुल जाता है, इसलिए हमनें 200 मिली बेंजीन और एसीटोन में बड़े-बड़े थर्माकोल के पीस डालकर देखे, सेकेंड्स में ही यह घुल गए और यह गम की तरह इस्तेमाल हो सके। इसके बाद हमनें इसके सॉल्वेंट्स को अलग अलग कॉम्बिनेशन और प्रपोर्शन में ट्राई किया और ऐसे में एक ऐसा सॉल्यूशन तैयार किया, जिसमें थर्माकोल ज्यादा से ज्यादा डिजॉल्व किया जा सके और इससे निकलने वाले रिशेड्यूल को मजबूत गम (गोंद) की तरह इस्तेमाल किया जा सके। यह गोंद फेविकोल जितना ही मजबूत और डयूरेबल है। इससे पेड़ भी बचेंगे क्योंकि कंपनियां गोंद बनाने के लिए भी पेड़ों को ही काट रही हैं।

आपदा में मदद करता है रोबो डॉग
भोपाल के शिवेंद्र और उनकी टीम ने एक रोबो डॉग तैयार किया है, जो प्राकृतिक और मानव जनित आपदा में लोगों की मदद करता है। कोम्बई नाम के यह रोबो डाग बाढ़, आग और सूखा जैसी आपदा की स्थिति में लोगों की रक्षा करेगा। शिवेंद्र ने बताया कि इसे बनाने में 1 साल लगा है। इसे रक्षा विभाग में भी तैनात किया जा सकता है। इसे आदेशित कर दुश्मनों पर हमला कराया जा सकता है।

कोल्ड स्टोरेज में 26% बिजली बचेगी
मैनिट के डिपार्टमेंट ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. केआर अहरवाल और उनकी टीम ने कोल्ड स्टोरेज के भीतर एयर सकुर्लेशन में सुधार कर सहायक ड्राफ्ट सिस्टम का अविष्कार किया। इससे कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं में बिजली की खपत में कमी आएगी। साथ ही कृषि उत्पाद महंगाई को नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके प्रयोग से कोल्ड स्टोरेज रूम में स्थिर वायु क्षेत्रों को मेंटेन किया जाता है और बिजली की खपत को कम करता है। इससे स्टोरेज को ठंडा करने की गति 23% तेज हो गई। वहीं इसमें 26% बिजली खपत की बचत हुई है। देश की कुल भंडारण क्षमता 39.42 मिलियन मीट्रिक टन है। इस तकनीक से संभावित ऊर्जा बचत लगभग 157,668 किलो वॉट हॉवर हो सकती है।
रिपोर्ट: मधुरिमा राजपाल